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कौन-से भगवान की करनी चाहिए कितनी परिक्रमा, ध्यान रखें ये जरूरी बातें, -पुराणिक ग्रन्थ

पूजा करते समय देवी-देवताओं की परिक्रमा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है भगवान की परिक्रमा से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं। इस परंपरा के पीछे धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। जिन मंदिरों में पूरे विधि-विधान के साथ देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित की जाती है, वहां मूर्ति के आसपास दिव्य शक्ति हमेशा सक्रिय रहती है। मूर्ति की परिक्रमा करने से उस शक्ति से हमें भी ऊर्जा मिलती है। इस ऊर्जा से मन शांत होता है। जिस दिशा में घड़ी की सुई घुमती है, उसी दिशा में परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि दैवीय ऊर्जा का प्रवाह भी इसी प्रकार रहता है।

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किस भगवान की कितनी परिक्रमा करना चाहिए

शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण की 3 परिक्रमा करनी चाहिए। देवी की 1 परिक्रमा करनी चाहिए। शिवजी की आधी परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि शिवजी के अभिषेक की धारा को लाघंना अशुभ माना जाता है।

परिक्रमा करते समय ध्यान रखनी चाहिए ये बातें

1. जिस देवी-देवता की परिक्रमा की जा रही है, उनके मंत्रों का जप करना चाहिए।

2. भगवान की परिक्रमा करते समय मन में बुराई, क्रोध, तनाव जैसे भाव नहीं होना चाहिए।

3. परिक्रमा नंगे पैर ही करना चाहिए।

4. परिक्रमा करते समय बातें नहीं करना चाहिए। शांत मन से परिक्रमा करें।

5. परिक्रमा करते समय तुलसी, रुद्राक्ष आदि की माला पहनेंगे तो बहुत शुभ रहता है।

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जन्म
Ø ईसापूर्व 375पंजाब (आज से 2392 साल पहले)
मृत्यु
Ø ईसापूर्व 283पाटलिपुत्र (आज से 2300 साल पहले)
निवास
Ø  पाटलिपुत्र
अन्य नाम
Ø  कौटिल्य, विष्णुगुप्त
विद्यालय
Ø  तक्षशिला
व्यवसाय
Ø  चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री
उल्लेखनीयकाम
Ø  अर्थशास्त्र, चाणक्यनीति


आचार्य  चाणक्य  तक्षशिला  के  गुरुकुल  में  अर्थशास्त्र  के  आचार्य  थे।चाणक्य राजनीति  में  भी   काफी  पारंगत  थे।  इनके  पिता  का  नाम  आचार्य  चणीक  था , इसी  वजह  से  इन्हें  चणी  पुत्र  चाणक्य  भी  कहा जाता  है।  चाणक्य  ने  कूटनीतिज्ञ  तरीके से  सम्राट  सिकंदर  को भारत  छोड़ने  पर  मजबूर  कर  दिया  था  और  चंद्रगुप्त  को  अखंड  भारत  का  सम्राट  भी  बनाया।  आचार्य  चाणक्य  ने  श्रेष्ठ  जीवन  के  लिए  चाणक्य  नीति  ग्रंथ  रचा  था। इसमें  दी  गई  नीतियों  का  पालन  करने  पर  जीवन में  सफलताएं  प्राप्त  होती  हैं।  यहां  जानिए  चाणक्य  की 10 खास  नीतियां ...-------------------------------------1:- सेवक को तब परखे, जब बह काम नहीं कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर बिपति में परखना चाहिए I
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